संदेश न्यूज़ 24 गोरखपुर : यक्तिगत दुश्मनी साधने के लिए अब झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाले भी कानूनी शिकंजे से बच नहीं पाएंगे। गलत तथ्यों के आधार पर कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज कराने का मामला हो या फिर सीधे थाने से एफआईआर का, दोनों में ही जांच के दौरान अगर तथ्य झूठे मिले तो कोर्ट में परिवाद दाखिल करना होगा।इस संबंध में उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।

जारी आदेश के मुताबिक, यदि किसी एफआईआर में दर्ज तथ्य विवेचना के दौरान गलत पाए जाते हैं और पुलिस अंतिम रिपोर्ट लगाने का निर्णय लेती है, तो ऐसे मामलों में वादी और झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से कार्रवाई होगी। उनके विरुद्ध बीएनएस की धारा 212 व 217 (पूर्व में आईपीसी की धारा 177 व 182) के तहत परिवाद न्यायालय में दाखिल किया जाएगा। इसके लिए न्यायालय की ओर से पुलिस को प्रारूप भी जारी किया गया है, जिस पर परिवाद दाखिल करना होगा।
यह प्रक्रिया तब शुरू होगी जब न्यायालय अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर ले और वादी द्वारा दाखिल प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र खारिज हो जाए। इसके बाद संबंधित थानेदार को तत्काल परिवाद तैयार कर अदालत में प्रस्तुत कराना होगा। यदि किसी मामले में कोर्ट के आदेश (धारा 175(3) बीएनएसएस/पूर्व में 156(3) सीआरपीसी) पर एफआईआर दर्ज हुई है और जांच में वह झूठी पाई जाती है, तब भी शिकायतकर्ता और गवाहों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, केवल उन्हीं गवाहों पर परिवाद किया जाएगा, जिनके बयान रिकॉर्ड किए गए हों।
साक्ष्य के अभाव में एफआर में नहीं होगी कार्रवाई
पुलिस को यह भी निर्देश है कि हर मामले में सतर्कता बरती जाए, ताकि वास्तविक पीड़ित शिकायत दर्ज कराने से हिचकें नहीं। यदि केवल साक्ष्य के अभाव में अंतिम रिपोर्ट लगाई गई है और शिकायतकर्ता द्वारा झूठी जानकारी देने का प्रमाण नहीं मिला है, तो ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होगी।
अलग रजिस्टर बनाना होगा, होगी समीक्षा
पुलिस विभाग को ऐसे मामलों का अलग रजिस्टर तैयार करने का भी निर्देश दिया गया है। थाने स्तर पर झूठी एफआईआर वाले मामलों को दर्ज किया जाएगा, जबकि क्षेत्राधिकारी अपने क्राइम रजिस्टर में इसकी समीक्षा करेंगे। हर महीने इन मामलों की समीक्षा कर रिपोर्ट कोर्ट से भी साझा की जाएगी। एसएसपी स्तर से लेकर जोनल एडीजी तक इस पूरी प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करेंगे। निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।




