संदेश न्यूज़ 24 * उत्तर प्रदेश में वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के बाद बदायूं की जामा मस्जिद में नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा किया गया है. अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने बदायूं सिविल कोर्ट में इसे लेकर याचिका दाखिल की है. कोर्ट ने याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार भी कर ली है. इस पर सुनवाई 15 सिंतबर को होगी.
कोर्ट ने जामा मस्जिद इंतजामिया समिति, सुन्नी वक्फ बोर्ड, पुरातत्व विभाग, केंद्र सरकार, यूपी सरकार, बदायूं जिला मजिस्ट्रेट और प्रमुख सचिव को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. इस मामले में मुस्लिम पक्ष के वकील का कहना है कि हिंदू पक्ष के पास याचिका के समर्थन में कोई सबूत नहीं हैं.
याचिकाकर्ता और अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने दावा किया, बदायूं की जामा मस्जिद परिसर हिंदू राजा महीपाल का किला था. मस्जिद की मौजूदा संरचना नीलकंठ महादेव के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई है. साल 1175 में पाल वंशीय राजपूत राजा अजयपाल ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था. मुगल शासक शमसुद्दीन अल्तमश ने इसे ध्वस्त करके जामिया मस्जिद बना दिया. यहां पहले नीलकंठ महादेव का मंदिर था.
हिंदू पक्ष के वकील वेद प्रकाश साहू ने बताया, गवर्नमेंट का गजेटियर साल 1986 में प्रकाशित हुआ था. इसमें अल्तमश ने मंदिर की प्रकृति बदलने का जिक्र किया है. याचिका में पहल पक्षकार भगवान नीलकंठ महादेव को बनाया गया है. साथ ही दावा करने वालों में मुकेश पटेल, वकील अरविंद परमार, ज्ञान प्रकाश, डॉ. अनुराग शर्मा और उमेश चंद्र शर्मा शामिल हैं.




